Thursday, January 5, 2017

Bhagavadgita 9-26, श्रीमद्भगवद्गीता ९-२६

श्लोकः
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः।।९-२६।

सन्धि विग्रहः
पत्रम् पुष्पम् फलम् तोयम् यः मे भक्त्या प्रयच्छति।
तत् अहम् भक्ति-उपहृतम् अश्नामि प्रयत आत्मनः।।९-२६।।

श्लोकार्थः
यः पत्रम् पुष्पम् फलम् तोयम् भक्त्या मे प्रयच्छति,
(तस्य) प्रयत-आत्मनः भक्ति-उपहृतम् तत् अहम् अश्नामि।

शब्दार्थः
9.26. पत्रम्=a leaf पुष्पम्=a flower फलम्=a fruit तोयम्=water यः=whoever मे=unto me भक्त्या=with devotion प्रयच्छति=offers तत्=that अहम्=I भक्ति-उपहृतम्=offered in devotion अश्नामि=accept प्रयत आत्मनः=from one in pure consciousness

Meaning
9.26: Whoever offers Me a leaf, a flower, a fruit, or water with devotion, piety and purity, (is My devotee). I accept them.